विद्या का जो दान दे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन गुरुदेव भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

विद्या का जो दान दे ऐसा,

विद्या का जो दान दे ऐसा,

मानव है भगवान,

मानव है भगवान,

इसी लिए कहते हैं गोविन्द से,

हे गुरु महान,

हे गुरु महान ॥

सदविचार सद्कर्म की प्रेरणा,

गुरु से पाते हैं,

इस पूंजी से सारे ताले,

खुलते जाते हैं,

बिना गुरु के कभी इस जगत का,

हो ना सके उद्धार,

हो ना सके उद्धार,

विद्या का जो दान दे ऐसा,

मानव है भगवान,

मानव है भगवान ॥

कला ज्ञान विज्ञान निति का,

संगम अनुपम है,

जो गोविन्द से मेल करा दे,

गुरु वो माध्यम है,

पग पग पर इनका आशीष है,

जीवन में वरदान,

जीवन में वरदान,

विद्या का जो दान दे ऐसा,

मानव है भगवान,

मानव है भगवान ॥

जीवन को जो अर्थ है देता,

सच्चा शिक्षक है,

कृष्ण सुदामा ने भी गुरु में,

पाया संरक्षक है,

एकलव्य से सीखे गुरु का,

करना हम सम्मान,

करना हम सम्मान,

विद्या का जो दान दे ऐसा,

मानव है भगवान,

मानव है भगवान।

इसी लिए कहते हैं गोविन्द से,

हे गुरु महान,

हे गुरु महान......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।