गोविन्द गली तेरी उस दिन ही छूटेगी

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

तेरी गलियों का हूँ आशिक़,

मैं किधर जाऊँगा,

तेरा दीदार ना होगा,

तो मैं मर जाऊँगा,

छोड़ कर सारे ज़माने को,

हुआ हूँ तेरा,

ताने मारेगा ज़माना,

मैं जिधर जाऊँगा।

गोविन्द गली तेरी,

उस दिन ही छूटेगी,

जिस दिन मेरी साँसों की,

ये डोरी टूटेगी,

गोविन्द गली तेरी,

उस दिन ही छूटेगी........

पत्थर हूँ मगर मेरी,

क़ीमत बढ़ जायेगी,

जिस रोज नज़र तेरी,

मुझ पे पड़ जायेगी,

क़ीमत बढ़ जायेगी,

मटकी तेरी करुणा की,

इक रोज तो फूटेगी,

गोविन्द गली तेरी,

उस दिन ही छूटेगी.......

जिन राहों से प्यारे,

तेरा आना जाना है,

मज़िल है वही मेरी,

वही मेरा ठिकाना है,

ये हक़ है मेरा मुझसे,

दुनियाँ क्या लुटेगी,

गोविन्द गली तेरी,

उस दिन ही छूटेगी........

बस तुझको मनाना है,

तेरा हो जाना है,

दीदार तेरा प्यारे,

पाना है तो पाना है,

बस तुझको मनाना है,

परवाह नहीं दुनियाँ,

मानेगी या रूठेगी,

गोविन्द गली तेरी,

उस दिन ही छूटेगी.......

मेरे श्याम गली तेरी,

उस दिन ही छूटेगी,

गोविन्द गली तेरी,

उस दिन ही छूटेगी,

जिस दिन मेरी साँसों की,

ये डोरी टूटेगी,

गोपाल गली तेरी,

उस दिन ही छूटेगी.........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।