गुरु मेरी पूजा

गुरु नानक देव जी
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॥ पावन पाठ ॥

गुरु मेरी पूजा, गुरु गोबिंद,

गुरु मेरा पारब्रह्म, गुरु भगवंत॥

गुरु मेरा देव, अलख अभेव,

सरब पूज्य, चरण गुरु सेवू,

गुरु मेरी पूजा, गुरु गोबिंद........

गुरु बिन अवर, नहीं मैं थाओ

अन दिन जपो, गुरु गुरु नाओ

गुरु मेरी पूजा, गुरु गोबिंद........

गुरु मेरा ज्ञान, गुरु हिर्दय ध्यान,

गुरु गोपाल, पुरख भगवान्,

गुरु मेरी पूजा, गुरु गोबिंद........

गुरु की सरन रहूँ कर जोर,

गुरु बिना मैं नाही होर,

गुरु मेरी पूजा, गुरु गोबिंद........

गुरु बोहित, तारे भव पार,

गुरु सेवा यम, ते छुटकार,

गुरु मेरी पूजा, गुरु गोबिंद........

अन्धकार में गुरु मन्त्र उजारा,

गुरु के संग सगल निस्तारा,

गुरु मेरी पूजा, गुरु गोबिंद........

गुरु पूरा पाईये वडभागी,

गुरु की सेवा दुःख ना लागी,

गुरु मेरी पूजा, गुरु गोबिंद........

गुरु का शब्द ना मेटे कोई,

गुरु नानक नानक हर सोयि,

गुरु मेरी पूजा, गुरु गोबिंद

गुरु मेरा पारब्रह्म, गुरु भगवंत ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।