नैनन में गोपाल

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

बसो मेरे नैनन में गोपाल,

बसो मेरे नैनन में गोपाल ॥

तेरी छवि पे बलि बलि जाउँ,

बांकेबिहारी लाल,

बसो मेरे नैनन में गोपाल,

बसो मेरे नैनन में गोपाल ॥

मोर मुकुट पीताम्बर सोहे,

गल वैजन्तीमाल,

बसो मेरे नैनन में गोपाल,

बसो मेरे नैनन में गोपाल ॥

तेरा दरस पाने को व्याकुल,

मन मेरा बेहाल,

बसो मेरे नैनन में गोपाल,

बसो मेरे नैनन में गोपाल ॥

कब तक तरसेगीं ये आंखें,

बीत रहे दिन साल,

बसो मेरे नैनन में गोपाल,

बसो मेरे नैनन में गोपाल ॥

राधारानी की कृपा मिले जो,

करूणामयी की कृपा मिले जो,

राधारानी की कृपा मिले जो,

बरसाने वाली की कृपा मिले जो,

हो जाऊं मैं निहाल,

बसो मेरे नैनन में गोपाल,

बसो मेरे नैनन में गोपाल ॥

संजय दूजी चाह ना कोई,

मेरी दूजी चाह ना कोई,

चाहूँ बस नन्दलाल,

बसो मेरे नैनन में गोपाल,

बसो मेरे नैनन में गोपाल........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।