बरी देर भाई नंदलाला

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

बरी देर भाई नंदलाला,

तेरी रह टके ब्रिज्बला,

ग्वाल बाल इक इक से पुच्छे,

कहा है मुरली वाला रे.,

बरी देर भाई नंदलाला,

तेरी रह टके ब्रिज्बला,

कोई ना जाए कुंजा गली में,

तुझा बिन कालिया चुनने को,

तरस रहे है जमुना के तट,

धुन मुरली की सुनने को,

अब तो दरस दिखड़े नटखट,

क्यों दुविधा मे डाला रे,

बरी देर भाई नंदलाला,

तेरी रह टके ब्रिज्बला,

संकट में है आज वो धरती,

जिस पर तूने जानम लिया,

पूरा कर दे आज वचन वह,

गीता मे जो तूने दिया,

कोई नही है तुझ बिन मोहन,

भारत का रखवाला रे.

बरी देर भाई नंदलाला,

तेरी रह टके ब्रिज्बला,

.

ग्वालबल एक एक से पुच्छे,

बरी देर भाई नंदलाला,

तेरी रह टके ब्रिज्बला,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।