नन्द के लाला आयो है

चित्र विचित्र
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

नन्द बाबा के, नन्द भवन में,

आनंद छायो है,

नन्द के लाला आयो है,

नन्द के लाला आयो है,

नन्द बाबा के, नन्द भवन में,

आनंद छायो है,

नन्द के लाला आयो है,

नन्द के लाला आयो है।

बजे ढोल मृदंग झाँझ ढप्प,

बाज रही शहनाई,

प्रकटे गोकुल में गोविंदा,

घर घर बजी बधाई,

पार ब्रह्म पूर्ण परमेश्वर,

दरस दिखायो है।

नन्द के लाला आयो है।

नन्द बाबा के, नन्द भवन में,

आनंद छायो है,

नन्द के लाला आयो है,

नन्द के लाला आयो है।

बरस रहा है केसर चन्दन,

बरस रही रस धारा,

जय गोविंदा, जय गोपाला,

गूँज रहा जयकारा,

झूम झूम कर, नाँच नाँच कर,

धूम मचायो है,

नन्द के लाला आयो है।

नन्द बाबा के, नन्द भवन में,

आनंद छायो है,

नन्द के लाला आयो है,

नन्द के लाला आयो है।

नन्द यशोदा नहीं समाते,

आज ख़ुशी के मारे,

नन्द भवन में लूट पड़ी है,

लूट रहे हैं सारे,

तू भी लूट ले आज "मधुप हरी"

लूट मचायो है,

नन्द के लाला आयो है।

नन्द बाबा के, नन्द भवन में,

आनंद छायो है,

नन्द के लाला आयो है,

नन्द के लाला आयो है।

नन्द के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की,

जय कन्हैया लाल की, जय हो गोपाल की,

नन्द के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की,

जय कन्हैया लाल की, जय हो गोपाल की,

हाथी दीने घोड़ा दीने और दीने पालकी,

बधाई हो, बधाई हो, बधाई हो,

जय राधे राधे।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।