मैं भी तेरे बाग दा फुल मेरे मालका

पारंपरिक
श्री राम भजन गुरुदेव भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

मैं भी तेरे बाग दा फुल मेरे मालका,

की होया जे हो गई मैं तो भुल मेरे मालका......-2

मैं भी तेरे बाग दा फुल मेरे मालका......

चंगे मंदे फुल सारे बागां विच हुंदे ने,

माली इनां फुलां दे हार पिरोंदे ने.....-2

पै जांदा ऐ इनां दा भी मुल मेरे मालका,

मैं भी तेरे बाग दा फुल मेरे मालका........

शवरी ने पलकां दे फर्श बिछाए सी,

सोणे सुंदर राम जी ने चरण शुआयें सी....-2

खट्टे मिठे बेरां उत्ते डुल गयो मालका,

मैं भी तेरे बाग दा फुल मेरे मालका.........

कईयां तेरे दर उत्ते धूणियां रमाईयां ने,

असां तेरे दर उत्ते झोलियां फैलाईयां ने....-2

पल्ला ना छुडाई जाणां मेरे मालका,

मैं भी तेरे बाग दा फुल मेरे मालका...........

दासन दासी अरज गुजारे,

खैर झोली पाईं दाता अपणे ही प्यार दी....-2

चरणां दी धूली झोली पाईं मेरे मालका,

मैं भी तेरे बाग दा फुल मेरे मालका.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।