साग सरसों दा बनाया

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

साग सरसों दा बनाया आमी आवी कृष्णा,

टोडा मक्की दा बनाया आके खावी कृष्णा,

तड़का मखन दा लगाया भोग लगावी कृष्णा,

छन्ना लस्सी दा बनाया आके पीवी कृष्णा.....

मैं ते साग पेई कपा, तेरे नाम दी माला जपा,

तेरी रावी पेई तका, आवी आवी कृष्णा,

आवी आवी कृष्णा, देर ना लावी कृष्णा,

साग सरसों दा बनाया आवी आवी कृष्णा.....

मैं ते साग पेई तोवा, तेरी याद बीच रोवा

तेनु नैना च बसाया, आवी आवी कृष्णा,

आवी आवी कृष्णा, देर ना लावी कृष्णा,

साग सरसों दा बनाया आवी आवी कृष्णा.....

मेरा साग पेया बडके, मेरी सज्जी आंख फड़के,

मेरा दिल पेया धड़के, आवी आवी कृष्णा,

आवी आवी कृष्णा, देर ना लावी कृष्णा,

साग सरसों दा बनाया आवी आवी कृष्णा.....

मैं ते साग बनाया, बीच नमक भी नी पाया

तेरी याद ने सताया, आवी आवी कृष्णा,

आवी आवी कृष्णा, देर ना लावी कृष्णा,

साग सरसों दा बनाया आवी आवी कृष्णा.....

सुनके भक्तो दी पुकार, आ गए कृष्ण मुरार,

खा गए टोडा ते साग भोग लगावी कृष्णा,

भोग लगावी कृष्णा, आवी आवी कृष्णा,

टोडा मक्की दा बनाया आके खावी कृष्णा,

तड़का मखन दा लगाया भोग लगावी कृष्णा,

छन्ना लस्सी दा बनाया आके पीवी कृष्णा.....

आवी आवी कृष्णा, देर ना लावी कृष्णा........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।