भोलेनाथ की नवीन आरती

पारंपरिक
महादेव आरती शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

हे भोलेनाथ तेरी आरती गाऊं,

आरती गाऊं तुम्हें चित्त में बसाऊं,

हे गौरीशंकर तेरी आरती गाऊं,

हे शिवशंकर तेरी आरती गाऊं,

हे भोलेनाथ तेरी आरती गाऊं ।

भगीरथी जब धरा पे आये,

जटा में भोले की वेग समाये,

जनहितकारी पे बलि बलि जाऊं,

हे भोलेनाथ तेरी आरती गाऊं ॥

हलाहल से सबको बचाते,

नीलकण्ठ तब आप कहाते,

उमापति के दर्शन पाऊं,

हे भोलेनाथ तेरी आरती गाऊं ॥

सरल हृदय, करुणा के सागर,

खाली ना रहती किसी की गागर,

कृपा की कुछ बूंदें पा जाऊं,

हे भोलेनाथ तेरी आरती गाऊं ॥

महादेव प्रभु, हो त्रिपुरारी,

भक्तों के हो भोले तुम भयहारी,

हर हर शम्भो कहके तुमको रिझाऊं,

हे भोलेनाथ तेरी आरती गाऊं ॥

पूजा, जप, तप, योग ना जानूं,

महादेव को अपना मानूं,

श्रद्धा सुमन चरणों में चढ़ाऊं,

हे भोलेनाथ तेरी आरती गाऊं ॥

हे भोलेनाथ तेरी आरती गाऊं,

आरती गाऊं तुम्हें चित्त में बसाऊं,

हे गौरीशंकर तेरी आरती गाऊं,

हे शिवशंकर तेरी आरती गाऊं.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।