मैं तो अपने मोहन की प्यारी साजन मेरो गिरधारी,

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मैं तो अपने मोहन की प्यारी साजन मेरो गिरधारी,

कौन रूप कौन रंग अंग शोभा काहू सखी,

काबू न देखि शवि वो निराली है,

तन मन धन वारी संवारी सूरत वारी,

माधुरी मूरत तीनो लोक से प्यारी है,

मुकुट लटक थारो लगे मत वालो है,

तेन सेन बेन जग उझारो है,

एसो है मेरो गिरधारी,

मैं तो अपने मोहन.............

आके माथे पे मुक्त देख चंद्रिका चटक देख,

तेरी शवि की लटक देख रूप रस पी जिए,

लोचन विशाल देख गले गूंज माल देख,

अजर सुहाल देख नैन रस ली जिए,

पिताम्वर की और देख मुरली की और देख,

संवारे की देख और देखते ही रिजिये,

एसो है मेरो गिरधारी,

मैं तो अपने मोहन.............

को कहू कुल ताकू लीन अप्लीन को,

को कहू रंकन कलंकन नारी हु,

कैसा देव लोक परलोक तिरलोक मैं तो,

तीनो ही लोक अलोक लोक लिंकन से नयारी हु,

तन काजू धन ताजू देव गुरु जन ताजू,

देख क्यों न जाऊ नैन संवारे पर वारी हु

एसो है मेरो गिरधारी,

मैं तो अपने मोहन.............

गगन मंगन चंदर मम छाल टी है ,

लाखो लाखो तारे जाके दीपक दरबार है

ब्रम्हा हु वजीर विष्णु कारदार जाके,

शंकर दीवान ताके इन्दर जामदार है,

कही अब दूत जाहे समज विचार देखो

लक्ष्मी चरण ओको वेद भंडारी है,

एसो है मेरो गिरधारी,

मैं तो अपने मोहन.............

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।