दादी तेरी बेटी आई

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॥ पावन पाठ ॥

ओ मेरी प्यारी दादी, देख तेरी बेटी आई,

संग में अपने ये तो बड़ी सौगातें लायी,

करले स्वीकार ओ दादी... बेटी है करे दुहाई

ओ मेरी प्यारी दादी, देख तेरी बेटी आई,

ओ मेरी प्यारी दादी, देख तेरी बेटी आई।

ओ मेरी प्यारी दादी, लाल चुनरिया सजाई,

सोने का तारा कढ़ा कर, जरी की बेल बनाई,

ओढ़ के तू भी नाँचे ओ..., ऐसी मैं चुनरिया बनाई,

ओ मेरी प्यारी दादी, देख तेरी बेटी आई।

सारे भगतों ने मिलकर, दादी के मेहँदी रचाई,

सखियों त्रिशूल मांडकर, दादी को मन हर्षाई,

दादी जी खुश हो करके ओ..., भगतां ने दे दे बधाई,

ओ मेरी प्यारी दादी, देख तेरी बेटी आई।

थारे मंदिर में आई, संग में भोग भी लाई,

खीर पूडा को व्यंजन, दादी मैं आज बनाई,

चख के देख ले दादी ओ..., करेगी तू भी बधाई,

ओ मेरी प्यारी दादी, देख तेरी बेटी आई।

ओ मेरी प्यारी दादी, भावना ये मैं लाइ,

तेरे द्वारे पर अर्ज़ी, है मैंने आज लगाई,

करले स्वीकार ओ दादी ओ..., वर्षा है द्वारे आई,

ओ मेरी प्यारी दादी, देख तेरी बेटी आई।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।