चारभुजा को मंदिर लागो बड़ो सुन्दर

पारंपरिक
अन्य भजन विविध भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

चारभुजा को मंदिर लागो बड़ो सुन्दर,

दर्शन की मन मे लागरी सा ॥

चारभुजा को मंदिर बरसनी के अन्दर,

शोभा बड़ी निराली सा,

चारभुजा को मंदिर लागो बड़ो सुन्दर,

दर्शन की मन मे लागरी सा ॥

निमाडला की छाया चारभुजा की माया,

देव बड़ा हितकारी सा,

चारभुजा को मंदिर लागो बड़ो सुन्दर,

दर्शन की मन मे लागरी सा ॥

चारभुजा री आरती में उबा रेवे जातरी,

नैया ने पार लगाओ सा,

चारभुजा को मंदिर लागो बड़ो सुन्दर,

दर्शन की मन मे लागरी सा ॥

झुलनी को मेलो होवे जातरी भेलो,

दुखिया का दुखड़ा काटसी सा,

चारभुजा को मंदिर लागो बड़ो सुन्दर,

दर्शन की मन मे लागरी सा ॥

चम्पा लाल जस गावे चरणा शीश नमावे,

दुबतड़ी नैया ने बेगि तारज्यो सा,

चारभुजा को मंदिर लागो बड़ो सुन्दर,

दर्शन की मन मे लागरी सा ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।