इनके दर्शन से सुख जीता

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

इनके दर्शन से सुख जीता,

इनके दर्शन से दुःख हारा,

ऐसे हैं हमारे विश्वनाथ,

ऐसे हैं हमारे ओमकारा,

इनके दर्शन से सुख जीता,

इनके दर्शन से दुःख हारा।।

अपने माथे जो इनकी भभूति मले,

अपने माथे जो इनकी भभूति मले,

जोर ना उस पे किसका ना कोई चले,

अपने भक्तो की रक्षा में,

रहते हर वक़्त खड़े,

देवों में ये महादेव हैं,

देव हैं सबसे बड़े,

जो एक बार देखे इनको,

ॐ नमः शिवाय हो जाए सफ़ल जीवन सारा,

इनके दर्शन से सुख जीता,

इनके दर्शन से दुःख हारा........

नीलकंठ बने विष का पान किया,

मरने वालों को जीवन का दान दिया,

द्रिष्टि डाली दया की तो,

सब पे उपकार किया,

तीसरा नेत्र खोला तो,

दैत्यों का संहार किया,

इनकी ही जटा से छनके,

ॐ नमः शिवाय बहती है गंगा की धारा,

इनके दर्शन से दुःख हारा,

इनके दर्शन से सुख जीता,

इनके दर्शन से दुःख हारा,

ऐसे हैं हमारे विश्वनाथ,

ऐसे हैं हमारे ओमकारा,

इनके दर्शन से सुख जीता,

इनके दर्शन से दुःख हारा.........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।