कन्हैया की याद आ गई

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

कन्हैया की याद आ गई,

दिल करे मिलने को,

लागे ना कहीं मन, मन रे चल वृन्दावन,

कन्हैया की याद आ गई,

दिल करे मिलने को.......

सारी रात मेरी अँखियों में नींद नहीं आई,

याद जो तेरी आए तो काटे कटी ना तन्हाई,

सारी रेन मैं जागा दिन हुआ निकलने को,

लागे ना कहीं मन, मन रे चल वृन्दावन.....

अपने दीवाने को तू इतना क्यों है तड़पाता,

हाल पे मेरे ज़रा भी तुझको तरस नहीं आता,

आँख में आंसू हुए देख अब छलकने को,

लागे ना कहीं मन, मन रे चल वृन्दावन.....

ओ छल बलिया तूने छल से छला मुझे ऐसे,

लचक यूँ तड़पे तड़पे मछली बिन पानी जैसे,

मैं ही मिला क्या तुझे इस तरह से छलने को,

लागे ना कहीं मन, मन रे चल वृन्दावन,

कन्हैया की याद आ गई,

दिल करे मिलने को,

लागे ना कहीं मन, मन रे चल वृन्दावन.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।