पिला दे ओ मईया

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

पिला दे ओ मईया/दाती, अपने नाम की मस्ती ll

तेरे हवाले, करदी मैंने ll,,

अपनी जीवन हस्ती,,,

पिला दे,,, जय हो lll ओ मईया/अम्बे,

अपने नाम की मस्ती ll

मैं तेरे चरणों में आया, "मन में लेकर आशा" l

जी भर मुझे पिला दे मईया, "न जाऊँ मैं प्यासा" ll

दाम की मुझको, फ़िक्र नहीं है ll,,

मँहगी हो या सस्ती,,,

पिला दे,,, जय हो lll ओ मईया,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

तुझको सर नजराना दे दूँ, "इक ही बूंद पिला दे" l

मन यह प्यासा तरस रहा है, "जी भर मुझे पिला दे" ll

सर देकर जो, बूंद मिले इक ll,,

तो भी जानू सस्ती,,,

पिला दे,,, जय हो lll ओ मईया,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

रंग की मुझको शर्त नहीं है, "कोई भी रंग पिला दे" l

रोज रोज गर नहीं पिलाना, "एक ही बार पिला दे" ll

पीने वाले, दाम ना पूछे ll,,

महंगी हो या सस्ती,,,

पिला दे,,, जय हो lll ओ मईया,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

हमने सुन रखे तेरे, "महखाने के ढंग निराले" l

मईया दीवाने तेरे सेवक, "पीकर हो गए मतवाले" ll

पिला मुझे भी, तूँ माँ ऐसी ll,,

पार लगेगी कश्ती,,,

पिला दे,,, जय हो lll ओ मईया,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

यही है अरदास दास की, "जग की पालनहारी" l

ऐसी मुझे पिला ना उतरे, "पूरी उम्र ख़ुमारी" ll

अब बिना पिए, ना जाए बावरा ll,,

मिट जाए चाहे हस्ती,,,

पिला दे,,, जय हो lll ओ मईया,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

तेरे नाम की पीने वाले, "दुनियाँ से नहीं डरते" l

सर जाए तो जाए बेशक, "शिकवा कभी ना करते" ll

तेरे हवाले, कर दी अम्बे ll,,

हमने अपनी कश्ती,,,

पिला दे,,, जय हो lll ओ मईया,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

मैं तेरे दरबार में आया, "लेकर दिल में आशा" l

ऐसी किरपा करदे अम्बे, "मर जाऊँ ना मैं प्यासा" ll

वसा रहे, तेरा महखाना ll,,

उजड़ जाए चाहे बस्ती,,,

पिला दे,,, जय हो lll ओ मईया,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।