मै अरज करू गुरा थाने चरणा में राखो म्हाणे!

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन गुरुदेव भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मै अरज करू गुरा थाने चरणा में राखो म्हाने।

हेलो प्रकट सुनो चाहे छाणे, मारी लाज शरम सब थाने।

ये भाई बंधु सुत माता मारे संग चले नही साथा॥

सब स्वारथ का है नाता, गुरू तारण तिरण तुम दाता।

ये भवजल भरियो भारी, दाता सुजत नाही किनारों॥

मै डुब रहयो मझधारो, दाता दिल में दया बिचारो।

ये संत बड़ा उपकारी है, जीवों का हितकारी॥

म्हाने आयो भरोसो भारी नही छोडु शरण तुम्हारी।

ये तन मन धन गुरा थारो, चाहे शिस काट लो म्हारो॥॥

यू दरिया दास ऊचारो मै चाकर हुँ चरणारों॥॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।