साईं का दीवाना मंन हमारा

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन साईं भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

साईं का दीवाना मंन हमारा

साईं ने जन्हा जन्हा भी ज्योत जलाई है ,

काली काली रात मई भी रौशनी सी आई है ,

अंखियो को खोल जरा ज्ञान के उजालो मई ,

रख विश्वास पूरा जग रखवाले मई ,

साईं रखवाली साईं तेरी सचाई है ,

साईं धन ही तेरी असली कमाई है ,

साईं ने जन्हा जन्हा भी ज्योत जलाई है ,

काली काली रात मई भी रौशनी सी आई है ,

द्वार द्वार भटके का दुःख बढ़ जाएगा ,

एक दर पकड़ेगा नशा चढ़ जाएगा ,

कितनी बार यह बात समजाई है ,

साईं के सिवाय हर चीज़ पराई है .

साईं ने जन्हा जन्हा भी ज्योत जलाई है ,

काली काली रात मई भी रौशनी सी आई है ,

साईं और देख अपनी दुनिया सवार ले ,

कितना सस्ता सौदा है प्यार देके प्यार ले ,

जिसने भी सच्चे दिल से आश लगाई है ,

साईं करम मई उसकी आश बंधाई है ,

साईं ने जन्हा जन्हा भी ज्योत जलाई है ,

काली काली रात मई भी रौशनी सी आई है ,

भक्ति के बंधनो को बांध पक्की डोर से ,

आंधिया चले गी इस सफर मई बड़े जोर से ,

माना इन रास्तो मई बड़ी कठिनाई है ,

लेकिन इन ठोकरों मई बड़ी गहराई है ,

साईं ने जन्हा जन्हा भी ज्योत जलाई है ,

काली काली रात मई भी रौशनी सी आई है ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।