अब तो लेलो रे अवतार

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

कबसे धरा सिसकती कान्हा तुझको रही पुकार,

अब तो लेलो रे अवतार अब तो लेलो रे अवतार,

आकर बोझ उतारो मेरा ओ मेरे आधार,

अब तो लेलो रे अवतार अब तो लेलो रे अवतार।

पाप बढ़ा है धर्म घटा है, घटती जाए उमरियां,

दीन दुखी लाचार की अब, ना लेता कोई खबरिया,

सभी व्यवस्थित करो प्रभु, अब वृकिट बहुत संसार,

अब तो ले लो रे अवतार, अब तो लेलो रे अवतार......

सभी जगह घुस गई मिलावट रिश्तों में आहट है,

धूमिल हुए है रिश्ते सारे, आई कड़वाहट है,

सभी मिलावट में डूबे, तेरे दूध दही आहार,

अब तो लेलो रे अवतार, अब तो लेलो रे अवतार......

पहले भी रक्षा करते हो, झोली भरते आये,

जब जब कोई तुम्हे पुकारे, नंगे पाँव पठाये,

मेरी प्रार्थना भी करुणा कर, सुनलो कृष्ण मुरार,

अब तो लेलो रे अवतार, अब तो लेलो रे अवतार।

कबसे धरा सिसकती कान्हा तुझको रही पुकार,

अब तो लेलो रे अवतार अब तो लेलो रे अवतार.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।