बस्ते में बांसुरी ले आया

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

गुरुकुल में पढ़ने जब आया साँवरा,

बस्ते में बाँसुरी ले आया सांवरा,

साथी सहपाठी सारे नाचने लगे,

ऐसी प्यारी बाँसुरी बजाया साँवरा,

गुरुकुल में पढ़ने जब आया सांवरा,

बस्ते में बाँसुरी ले आया सांवरा......

ज्ञानी को ज्ञान सिखा रहे हैं गुरुजन,

जगत गुरु को पढ़ा रहे हैं गुरुजन,

देख के सुदामा को मुस्काया साँवरा,

बस्ते में बाँसुरी ले आया सांवरा,

बस्ते में बाँसुरी ले आया साँवरा.......

मित्रता का पाठ देखो पढ़ रहा है साँवरा,

सुदामा संग दोस्ती को गढ़ रहा है सांवरा,

यारी अपनी पक्की कर आया साँवरा,

बस्ते में बाँसुरी ले आया सांवरा,

बस्ते में बाँसुरी ले आया साँवरा......

ग्वाल बाल संग लीला करे खेल खेल में,

जमुना किनारे पहुँचे कान्हाँ गेंद खेलने,

कालीनाग वश कर आया साँवरा,

बस्ते में बाँसुरी ले आया सांवरा,

बस्ते में बाँसुरी ले आया साँवरा......

गोपियों को छेड़ते हैं, फोड़ते हैं मटकी,

माखन चुराने की आदत नटखट की,

रोमी को भी मुरली पे नचाया साँवरा,

बस्ते में बाँसुरी ले आया सांवरा,

बस्ते में बाँसुरी ले आया साँवरा.......

गुरुकुल में पढ़ने जब आया साँवरा,

बस्ते में बाँसुरी ले आया सांवरा,

साथी सहपाठी सारे नाचने लगे,

ऐसी प्यारी बाँसुरी बजाया साँवरा.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।