मेरे दिल नूं बड़ा ही भा गया

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॥ पावन पाठ ॥

मेरे जोगी पौणाहारी दा, सुना रूप बड़ा मनमोहणा ए,

सारी दुनियाँ घूम के वेख लवो,

ना जोगी जेहा कोई होणा ए,

मेरे दिल नूं बड़ा ही भा गया, चिमटे वाला जोगी,

मैनु बड़ा नज़ारा,

मैनु बड़ा नज़ारा,आ गया, चिमटे वाला जोगी,

मेरे दिल नूं बड़ा ही भा गया, चिमटे वाला जोगी......

ऐ हदी सूरत मेन्नु नूं मोह गई, सच्ची मैं जोगी दी हो गई,

अज्ज नशा नाम दा,

अज्ज नशा नाम दा छा गया, चिमटे वाला जोगी,

मेरे दिल नूं बड़ा ही भा गया, चिमटे वाला जोगी......

सींगिया वाल, दुद्धाधरी, तक्क जोगी दी मोर सवारी,

दिल जोगी जोगी,

दिल जोगी जोगी हो गया, चिमटे वाला जोगी,

मेरे दिल नूं बड़ा ही भा गया, चिमटे वाला जोगी.....

राजू हरिपुरिया ध्यावे, तरुणी जय बाबे दी गावे,

मेरी जिंदगी नूं,

मेरी जिंदगी नूं महका गया, चिमटे वाला जोगी,

मेरे दिल नूं बड़ा ही भा गया, चिमटे वाला जोगी.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।