नाथा चो नाथ निराला

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॥ पावन पाठ ॥

दीद पियासे नैणां नूं अज्ज नाथ ने दीद कराणी ऐ,

रहमत वाली नाथ ने मेरी अज्ज ख़ैर झोली विच्च पौणी ए,

नाथां चो नाथ निराला, जोगी मेरा धुनें वाला,

बालक नाथ भुख्खा प्यारा दा, कुछ होर ना मंगे,

जोगी दर जो भी आवे, बाबे दी रहमत पावै,

नाथां दर जो भी आवे, बाबे दी रहमत पावै,

दिल ना किसे दा बाबा तोड़दा, शंकर दा प्यारा,

किसे नूं ना खाली कदे मोड़दा, शंकर दा प्यारा.....

दुक्खां नूं दूर भजावे, सुखां दे बुटें लावे,

महक दी एदी ए फुलवारी, जी मैं झूठ ना बोला,

वंडदा महका पौणाहारी, जी मैं झूठ ना बोला,

महक दी एदी फुलवारी, जी मैं झूठ ना बोला,

वंडदा महका पौणाहारी, जी मैं झूठ ना बोला,.....

सुण लेंदा ए फ़रियादा, देंदा अनमोल मुरादा,

आके जेड़ा पलड़ा बिछौन्दा ए, मेरा सींगिया वाला,

खैर ओदी झोली विच पौंदा ए, मेरा सींगिया वाला,

आके जेड़ा पलड़ा बिछौन्दा ए, मेरा सींगिया वाला,

खैर ओदी झोली विच पौंदा ए, मेरा सींगिया वाला.....

सोनू ना दान नूं वंडे, सुख देके दुखड़े छंडे,

बड़ा ही दयालु मेरा नाथ जी, रतनों दा पाली,

छड्दा ना कदे ना मेरा साथ जी रतनों दा पाली,

बड़ा ही दयालु मेरा नाथ जी, रतनों दा पाली,

छड्दा ना कदे ना मेरा साथ जी रतनों दा पाली.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।