कर्म तेरा साईयाँ

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

है कर्म तेरा साईयाँ, मेरे ते बाल जोगी,

पूछना सी कीने सानूं, जे तू ना हुँदा नाल जोगी,

है कर्म तेरा साईयाँ, मेरे ते बाल जोगी,

पूछना सी कीने सानूं, जे तू ना हुँदा नाल जोगी,

कई वार आखदे ने, मेरे खयाल जोगी,

पूछना सी कीने सानूं, जे तू ना हुँदा नाल जोगी,

कई वार आखदे ने, मेरे खयाल जोगी,

पूछना सी कीने सानूं, जे तू ना हुँदा नाल जोगी,

है कर्म तेरा साईयाँ, मेरे ते बाल जोगी,

पूछना सी कीने सानूं, जे तू ना हुँदा नाल जोगी.......

जिंदगी दे सागरा दे विच लहरा ने कई उठियाँ,

जिंदगी दे सागरा दे विच, सैलाब कई उठिया,

नहीं डोलदी वड दी, लइ तू संभाल जोगी,

पूछना सी कीने सानूं, जे तू ना हुँदा नाल जोगी......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।