पौणाहारि जोगी हो गया

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॥ पावन पाठ ॥

जयकारा पौणाहारि जी दा, बोल सांचे दरबार की जय।।

माई रत्नों तेरियां गलां दा मारेया नी पौणाहारि जोगी हो गया।

जोगी हो गया बैरागी हो गया।

माई रत्नों तेरियां गलां दा मारेया नी पौणाहारि जोगी हो गया......

लोहा लेई मैं लोहार कोलो जांदियां...-2

लोहारा वे सोणा जेया चिमटा बना दे के पौणाहारी जोगी हो गया।

माई रत्नों तेरियां गलां दा मारेया नी पौणाहारि जोगी हो गया.....

सोना लेई सुनार कोलों जांदियां...-2

सुनायरा वे सोणी जेई सिंगी बना दे के पौणाहारि जोगी हो गया।

माई रत्नों तेरियां गलां दा मारेया नी पौणाहारि जोगी हो गया.....

आटा लेई हलवाई कोलो जांदियां....-2

हलवाईआ वे मिठा जेया रोट बना दे के पौणाहारि जोगी हो गया।

माई रत्नों तेरियां गलां दा मारेया नी पौणाहारि जोगी हो गया....

कपड़ा लेई मैं दर्जी कोलो जांदियां....-2

दर्जीआ वे सोणा जेया चोला बनादे के पौणाहारिरी जोगी हो गया।

माई रत्नों तेरियां गलां दा मारेया नी पौणाहारि जोगी हो गया।

जोगी हो गया बैरागी हो गया।

माई रत्नों तेरियां गलां दा मारेया नी पौणाहारि जोगी हो गया.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।