साईं नाम अविनाशी

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

आ…

साईं नाम अविनाशी

भज मन

साईं नाम अविनाशी

भज मन

साईं नाम अविनाशी

साईं नाम अविनाशी

भज मन

साईं नाम अविनाशी

साईं नाम अविनाशी

भज मन

साईं नाम अविनाशी

शिर्डी वाले साईं बाबा

शिर्डी वाले साईं बाबा

घट घट के हैं वासी

घट घट के हैं वासी

भज मन

साईं नाम अविनाशी

रूप फकीरी ऐसा साईं का

तन पे कफनी हाथ में सटका

रूप फकीरी ऐसा साईं का

तन पे कफनी हाथ में सटका

करुणा छलक रही चेहरे से

करुणा छलक रही चेहरे से

साईं सगुण सुख राशि

भज मन

साईं नाम अविनाशी

साईं नाम अविनाशी

भज मन

साईं नाम अविनाशी

भक्ति भाव से जो भी पुकारे

साईं दुःख हर लेते सारे

भक्ति भाव से जो भी पुकारे

साईं दुःख हर लेते सारे

लीला फैली जग में ऐसी

लीला फैली जग में ऐसी

लीला फैली जग में ऐसी

दुनिया बनी है दासी

भज मन

साईं नाम अविनाशी

साईं नाम अविनाशी

भज मन

साईं नाम अविनाशी

चारों धाम हो गया शिर्डी

चारों धाम हो गया शिर्डी

बन गया मथुरा काशी

भज मन

साईं नाम अविनाशी

भज मन

साईं नाम अविनाशी

भज मन

साईं नाम अविनाशी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।