भैया मेरे भैया

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॥ पावन पाठ ॥

भैया मेरे भैया,

राखी के दिन चले आना,

भाई बहन का नाता अमर है,

तू संग है तो काहे का डर है,

अपनी बहन को ना तू भूल जाना,

राखी के दिन चले आना।

भैया मेरे भैया......

तेरी कलाई पे जो,

मैंने बांधा है धागा,

भाई से बहना को है,

लेना रक्षा का वादा,

बहना पे कोई आँच जो आए,

भाई बहन पे जान लुटाए,

वादा किया है तो वादा निभाना,

राखी के दिन चले आना,

भैया मेरे भैया,

राखी के दिन चले आना।

पूरे बरस में भैया,

एक दिन बहना को देना,

अपनी बलाएं देके,

मुझसे दुआएं लेना,

तुम पे न्यछावर जीवन ये सारा,

देखूँगी इस दिन रस्ता तुम्हारा,

तुमको कसम है ना मुझको रुलाना,

राखी के दिन चले आना,

भैया मेरे भैया,

राखी के दिन चले आना।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।