ज्योत जले दिन रात

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

ज्योत जले दिन रात,

मईया जी तेरी ज्योत जले lllll

इस ज्योति का, रूप निराला l

अँधेरे में, करदे उजाला ll

मेरे मन में, वस जा भवानी ll,

हर पल रहना साथ,

मईया जी तेरी ज्योत जले,

ज्योत जले दिन रात,

मईया जी तेरी ज्योत जले,,,

ज्योत जले दिन रात..........

दुःखियों को तूँ, गले लगावे l

विछड़ों को तूँ, आप मिलावे ll

मुझ को बुला ले, शेरांवाली ll,

छोड़ न देना साथ,

मईया जी तेरी ज्योत जले,

ज्योत जले दिन रात,

मईया जी तेरी ज्योत जले,,,

ज्योत जले दिन रात..........

द्वार तेरे पे, जो भी आवे l

बिन मांगे वोह, सब कुछ पावे ll

मेरी भी झोली, भर दो भवानी ll,

कभी न करना निराश,

मईया जी तेरी ज्योत जले,

ज्योत जले दिन रात,

मईया जी तेरी ज्योत जले,,,

ज्योत जले दिन रात,

मईया जी तेरी ज्योत जले llllll

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।