ज्योत जगे सारी रात

नरेन्द्र चंचल
श्री राम भजन दुर्गा भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

ज्योत जगे सारी रात, मईया के जगराते में ll

^ढोलक छैनों की झंकार, गूँजे भक्तों की जयकार l

बरसे, मेहरों की बरसात, मईया के जगराते में l

ज्योत जगे सारी रात, मईया के जगराते में l

जगमग जागे ज्योत, ज्योत देवों ने मानी,

गाए वेद पुराण, महिमा संतों ने वखाणी ll

^चमके सूरज चाँद सितारे, पावन ज्योति के ही सहारे l

देखो, ज्योत की करामात, मईया के जगराते में l

ज्योत जगे सारी रात, मईया के जगराते में l

ज्योत की शक्ति देख, झुके आकरअभिमानी,

हुआ था मंडप चूर, अभी भी है छत्तर निशानी ll

^माँ की ज्योति के गुण गाएं, ध्यानु भक्त अमर कहलाएँ l

अब, बदलेंगे हालात, मईया के जगराते में l

ज्योत जगे सारी रात, मईया के जगराते में l

ज्योति रूप ज्वाला, करे सब की सुनवाई,

बाँटे दया का खज़ाना, जग जननी महाँमाई ll

^कोई बड़ा न कोई छोटा, देखे सरल ख़रा न खोटा l

मिले, मुँह माँगी सौगात, मईया के जगराते में l

ज्योत जगे सारी रात, मईया के जगराते में l

जगराते में ज्योत जगे, मईया जी की ज्योत जगे llll

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।