ओ ज्योतावालीये माँ तेरी आरती

पारंपरिक
माता दुर्गा आरती दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मन तेरा मंदिर, आखेँ दिया बाती,

होठों की है थालीयाँ, बोल फुल पाती

रोम रोम जिव्हा तेरा नाम पुकारती

आरती ओ मैया आरती

ओ ज्योतावालीये माँ तेरी आरती

हे महालक्ष्मी माँ गौरी, तू अपनी आप है जौहरी

तेरी कीमत तु ही जाने, तु बुरा भला पहचाने

ये कहते दिन और रातें, तेरी लिखी ना जाये बातें

कोइ माने या ना माने, हम भक्त तेरे दिवाने

कोइ माने या ना माने, हम भक्त तेरे दिवाने

तेरे पावँ सारी दुनियाँ पखारती

मन तेरा मंदिर, आखेँ दिया बाती,

होठों की है थालीयाँ, बोल फुल पाती

रोम रोम जिव्हा तेरा नाम पुकारती

आरती ओ मैया आरती

ओ ज्योतावालीये माँ तेरी आरती

हे गुणवंती सतवंती, हे पदवंती रसवंती

मेरी सुनना ये विनंती, मेरा चोला रंग बंसती

हे दुखःभजंन सुखदाती, हमे सुख देना दिन रात्री

जो तेरी महिमा गाये, मुँह माँगी मुरादे पाये

जो तेरी महिमा गाये, मुँह माँगी मुरादे पाये

हर आँख तेरी और निहारती

मन तेरा मंदिर आखेँ दिया बाती,

होठों की थालीयाँ, बोल फुल पाती

रोम रोम जिव्हा तेरा नाम पुकारती

आरती ओ मैया आरती

ओ ज्योतावाली माँ तेरी आरती

हे महाकाल महाशक्ती, हमे दे दे ऐसी भक्ती

हे जगजननी महामाया, है तु ही धूप और छाया

तू अमर अजर अविनाशी, तु अनमिट पू्र्णमासी

सब करके दुर अंधेरे, हमे बक्क्षों नये सवेरे

सब करके दुर अंधेरे, हमे बक्क्षों नये सवेरे

तु तो भक्तों की बिगडी सँवारती

मन तेरा मंदिर, आखेँ दिया बाती,

होठों की थालीयाँ बोल फुल पाती

रोम रोम जिव्हा तेरा नाम पुकारती

आरती ओ मैया आरती

ओ ज्योतावालीयें माँ तेरी आरती

ओ तेरे पाँव सारी दुनियाँ पखारती

औ लाटावालीये माँ तेरी आरती

औ हर आँख तेरी ओर निहारती

औ ज्योतावालीये माँ तेरी आरती

औ तु तो भक्तों की बिगडी सँवारती

मन तेरा मंदिर आखेँ दिया बाती,

होठों की है थालीयाँ बोल फुल पाती

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।