श्यामा के रंग हजारों हैं

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

श्यामा के रंग हजारों हैं, इनके रंगों का क्या कहना....

कोई काला कहे, कोई गोरा कहे,

कोई कहे नटखट, कोई कहे ग्वाला,

इनके नामों का क्या कहना, इनके कामों का क्या कहना,

श्यामा के रंग हजारों हैं......

इन्द्र कोप ढहाते है, पर्वत अंगुली पर उठाते हैं,

पर्वत का उठाना क्या कहना, भक्तों को बचाना क्या कहना,

श्यामा के रंग हजारों हैं.....

धरती पर जब जब आते, ये नई नई महिमा रचाते हैं,

हर युग में आना क्या कहना, महिमा का रचाना क्या कहना,

श्यामा के रंग हजारों हैं.....

जब जब कंस ने जुल्म किया, तब तब नटवर ने रुप धरा,

जुल्मों से बचाना क्या कहना, नटवर के रुप का क्या कहना,

श्यामा के रंग हजारों हैं.....

बनवारी अब तो आ जाओ और दिल में हमारे बस जाओ,

बनवारी का आना क्या कहना, दिल में समाना क्या कहना,

श्यामा के रंग हजारों हैं.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।