थाँह थाँह भवानी बचड़े ने टोलेया

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

थाँह थाँह भवानी बचड़े ने टोलेया,

अजे ना तू मेहरा दा भण्डारा खोलेया,

थाँह थाँह भवानी बचड़े ने टोलेया.....

तेरे ने दीदार दीयां लोहणा,

होर नही दातीऐ मैनु लोहणा,

तेरे ने दीदार दीयां तांगा, दोंवे हथ दातीऐ मैं जोड़ा,

कर कृपा नादान मान के,

कर कृपा नादान मान के क्यों मेरा मन डोलेया।

थाँह थाँह भवानी बचड़े ने टोलेया.....

खून जिगर दा मै पीवां, किस दे सहारे दस जीवां,

तेरी याद विच महारानी, गुडीया पटौले नित सीवां,

कर कृपा अनजान मान के,

कर कृपा अनजान मान के क्यों मेरा मन डोलेया।

थाँह थाँह भवानी बचड़े ने टोलेया.....

गुफा विच बैठी पिंडीरानी, जगदम्बे, जगजननी महारानी,

नंगे पैरी दर तेरे आया, कर कृपा कल्यानी,

दे भक्ति दा दान दातिये,

दे भक्ति दा दान दातिये क्यो मैनु दर दर रोलेया।

थाँह थाँह भवानी बचड़े ने टोलेया.....

मेरा हाल वांग है फकीरा, तेरे हथ दातीऐ जगीरा,

नित पूजा मै महारानी, तेरियां सुन्दर तस्वीरा,

कर कृपा निर्दोष मान के,

कर कृपा निर्दोष मान के क्यों मेरा मन डोलेया।

थाँह थाँह भवानी बचड़े ने टोलेया

अजे ना तू मेहरा दा भण्डारा खोलेया

अजे ना तू मेहरा दा भण्डारा खोलेया.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।