जय जय माई कालका

नरेन्द्र चंचल
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

जय जय माई कालका जीवे तेरा बालका,

जय हो माई कालका जीवे तेरा बालका,

जिसके संग में तू है माता उसको डर क्या काल का,

जय जय माई कालका जीवे तेरा बालका.....

तू जग दी पालनहारी तू जग दी है हितकारी,

तू सबके संकट हरदी तू सबके कृपा करदी,

तेरे दर जो भी आये कभी खाली ना जाये,

तू सबके भरे भंडारे तू अटके बेड़े तारे,

रूप सलोना मुखड़ा भोला दर है तेरा कमाल का,

जय जय माई कालका जीवे तेरा बालका......

तू निर्धन को धन देती तू निर्बल को बल देती,

तू आशा पूरी करदी तू सबकी झोली भरदी,

जो तेरा हुआ दीवाना उसे दुनिया ने माना,

जो तेरे दर का भिखारी तू उसपे है बलिहारी,

आंच ना आने दे भक्तो पर काम करे तू डालका,

जय जय माई कालका जीवे तेरा बालका.....

जिसे जग ने ठुकराया उसे सीने से लगाया,

ये सूरज चाँद सितारे तेरे ही खेल है सारे,

तू सारे जग की माँ है तेरे चरणों में जहां है,

ये धरती पर्वत सागर तेरी ही कृपा सब पर,

मुखड़ा लाल गुलाल है दाती तेरे हर इक लाल का,

जय जय माई कालका जीवे तेरा बालका...

ये तेरी फ़ौज कालका मनाये मौज कालका,

तू रहना संग हमारे के हम बच्चे है तुम्हारे,

ना सर से हाथ उठाना ना इस चंचल को भुलाना,

माँ हो जब तेरे जैसी हमे फिर चिंता कैसी,

रखती हो माँ मान हमारे छोटे बड़े सवाल का,

जय जय माई कालका जीवे तेरा बालका,

जिसके संग में तू है माता उसको डर क्या काल का,

जय जय माई कालका जीवे तेरा बालका.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।