कटदी हमेशा ही जो दासा दे तू दुखड़े

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

कटदी हमेशा ही जो दासा दे तू दुखड़े,

मेरी वारी कांनु मैया गुफा विच लुक गई,

कटदी हमेशा ही जो दासा दे तू दुखड़े...

शेरावालीये मै डिगा तेरे ही द्वारे ते,

जिन्दगी दे दिन कटे तेरे ही सहारे ते....-2

दुखा विच रूल रूल जिन्द मेरी मुक गई,

कटदी हमेशा ही जो दासा दे तू दुखड़े.....

जर्रे जर्रे विच तेरी ज्योति दा नूर है,

अभिमानी आँखे मेरी दाती मेंथो दूर है...-2

गर्दन ऐह जो तेरे द्वारे झुक गई,

कटदी हमेशा ही जो दासा दे तू दुखड़े......

देवतिया कीती जदो मिलके पुकार सी,

सुन के पुकार तूहीयों लिता अवतार सी....-2

मेरे ऊते दया करनी क्यो मैया रुक गई,

कटदी हमेशा ही जो दासा दे तू दुखड़े......

खोल के की हाल दसां जग दे जजांल दा,

मांवा बिना पुत्रा नु कोई ना सभांल दा....-2

आसां वाली बेल मेरी क्यों मैया सुख गई,

कटदी हमेशा ही जो दासा दे तू दुखड़े......

चमन निमाणा तेरे दर्शना नु लोचदा,

आंवा किंवे कोल तेरे ऐहो पया सोचदा...-2

विषय विकारा विच अकल मेरी रुक गई,

कटदी हमेशा ही जो दासा दे तू दुखड़े

मेरी वारी कांनु मैया गुफा विच लुक गई

कटदी हमेशा ही जो दासा दे तू दुखड़े.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।