दादी खोल दे दरवाजो

पारंपरिक
विष्णु भगवान भजन रानी सती दादी भजन vishnu
॥ पावन पाठ ॥

भादवै की मस्ती में नाचांगा गावांगा,

ओ दादी, ओ दादी

ओ दादी खोल दे दरवाजो म्हें तो केड आवांगा,

भादवै की मस्ती में नाचांगा गावांगा,

ओ दादी खोल दे दरवाजो म्हें तो केड आवांगा....

रोली मौली अक्षत मेहंदी ल्याया भक्त हजार,

सोणो सोणो गजरो ल्याकर रहा हाँ बाट निहार....-2

छैल छबीलो सथीयो थारो म्हें बणावांगा,

ओ दादी, ओ दादी

ओ दादी खोल दे दरवाजो म्हें तो केड आवांगा.....

ओढ़ चुनरिया लाल सुरंगी हरिया मेहंदी हाथ,

भोला ढाला टाबरिया के पल पल रहियो साथ...-2

मीठा-मीठा थाणे दादी भजन सुणावांगा,

ओ दादी, ओ दादी

ओ दादी खोल दे दरवाजो म्हें तो केड आवांगा.....

मावस के दिन धोक लगाते करते जय जयकार,

दादी म्हारी कुलदेवी थे रखियो खुश परिवार....-2

"मधु" बोले थाणे दादी आज रिझावांगा,

ओ दादी, ओ दादी

ओ दादी खोल दे दरवाजो म्हें तो केड आवांगा.....

लाडु बुंदिया खीर चूरमा सागै भुजिया अचार,

छप्पन भोग छत्तीसों व्यंजन ल्याया थारै द्वार....-2

लाड प्यार से थाणे दादी म्हें जिमावांगा,

ओ दादी, ओ दादी

ओ दादी खोल दे दरवाजो म्हें तो केड आवांगा,

भादवै की मस्ती में नाचांगा गावांगा,

ओ दादी, ओ दादी

ओ दादी खोल दे दरवाजो म्हें तो केड आवांगा.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।