घंटा चार का बजता है

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॥ पावन पाठ ॥

घर का नौकर बाहर का बाबू माजे तवा परात, किसी से मत कहना

घंटा चार का बजता है बीवी मुझे जगाती है

सुबह की चाय का चूल्हा भी मुझसे ही जलवाती है

जो हो जाये मुझे देर सबेर, मारे दो घूसे दो लात

घर का नौकर बाहर का बाबू माजे तवा परात, किसी से मत कहना

बच्चों के कपड़े धोना बीवीजी ने छोड़ दिया

छुट्टी के दिन धोता हूँ होकर के लाचार

घर का नौकर बाहर का बाबू माजे तवा परात, किसी से मत कहना

मेरी माँ बहनो से वो इंग्लिश मैं बतियाती है

अगर मगर की भाषा बोले पढ़ी न एक क्लास

किसी से मत कहना

घर का नौकर बाहर का बाबू माजे तवा परात, किसी से मत कहना

नाम चित्रा

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।