शिव डमरू बोले डम डम

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

शिव डमरू बोले डम डम,

शिव डमरू बोले डम डम

भेद खोले बम बम बम,

जब भी बनता ये संसार,

अंत में जाता सिधार....

सब कुछ जानता बंदा, जान बूझ कर बनता अंधा,

काम कोई ना सीधा किया, जो कुछ किया उलटा धंधा,

पाप बढे पुण्य घटे, बोलो बम बम बम,

शिव डमरू……

लाला जी की सुनो जुबानी, बहुत मिलाया दूध में पानी,

माल ब्लैक कर बहुत कमाया, समझा मै हूँ पैसे वाला,

हुआ एक्सीडेंट फटा पेट, बोलो बम बम बम,

शिव डमरू……

सुन लो मेरे बहन और भाई, पूंजी तुमने यूँ ही गंवाई,

बाहर के फैशन में आकर तुमने कर ली अपनी लुटाई,

अब फूट गया पाप घड़ा, बोलो बम बम बम,

शिव डमरू………….

कर्मों का फल धरती पर है, इंसां तू क्यो इसको भूला,

कहीं पे मासा कहीं पे तोला, कहीं पर है खाली झोला,

उस मालिक का कहना मान, बोलो बम बम बम,

शिव डमरु………….

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।