नबजिया वैद क्या जाणे

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॥ पावन पाठ ॥

नबजिया वैद क्या जाणे,

मुझे दिल कि बीमारी है।।

कभी कफ रोग बतलाये,

कभी तासीर गरमी की,

जिगर का हाल तू मेरा,

नहीं जाने अनाडी है,

नबजिया वैद क्या देखे,

मुझे दिल कि बीमारी है।।

असर करती नहीं कोई,

दवाई कीमती तेरी,

बिना दीदार दिलबर के,

मिटे नहीं बेकरारी है,

नबजिया वैद क्या देखे,

मुझे दिल कि बीमारी है।।

सनम कि मोहिनी मूरत,

बसी दिल बीच में मेरे,

ना मन में चैन है तन की,

खबर सारी बिसारी है,

नबजिया वैद क्या देखे,

मुझे दिल कि बीमारी है।।

अपलोड- रवि सेन नरसिंह

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।