मेरा शिवजी मस्त मलंग

मास्टर सलीम
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

मत्थे ते चंद सजा के,

गल दे विच फनियन पाके,

तन उते भसम है सोहणा,

साँवला है रंग,

मेरा भोला मस्त मलंग,

मेरा शिवजी मस्त मलंग,

मेरा भोला मस्त मलंग,

मेरा शिवजी मस्त मलंग।

मधुर मुस्कान है उसकी,

शहाना शान है उसकी,

जटाधारी, महा दानी,

यही पहचान है उसकी,

भगता दी पूरी करदा,

हर इक माँग,

मेरा भोला मस्त मलंग,

मेरा शिवजी मस्त मलंग,

मस्ती में वो ऐसे नाचे,

के घुंघरू छम छम बाजे,

देव महादेव त्रिपुरारी,

हर अदा मनमोहक लागे,

सबनू पिलाये भोला,

नाम वाली भंग,

मेरा भोला मस्त मलंग,

मेरा शिवजी मस्त मलंग,

उसे कैलाश प्यारा है,

हमें उसका सहारा है,

देवे दर्शन मेरे बाबा,

हमने जब भी पुकारा है,

तेजी सलीम सरजीवन दे रेह्न्दा संग,

मेरा भोला मस्त मलंग,

मेरा शिवजी मस्त मलंग.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।