घूमा दे भोले जोगियां

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

नन्दी पे बिठा के तू, घूमा दे भोले जोगियां,

देखूँ सारा सँसार, चले पर्वत के उस पार,

दुनियाँ देखन दे देखन दे,

कलयुग का ये दौर,गौरा बदली सारी दुनियाँ,

बड़ा स्वार्थी सँसार, वहाँ जाना है बेकार,

तप कर लेन दे कर लेन दे,

नन्दी पे बिठा के तू, घूमा दे भोले जोगियाँ......

कैसी भोले तुमने दुनियाँ बनाई, देखूँगी एक बार हो,

पापी अधर्मी लोग यहाँ पे, बहुत बुरा सँसार हो,

तुम तो कहते मेरे जगत में, तुम तो कहते मेरे जगत में,

होती है जय जयकार हो,

गौरा रानी सुनो ये है, माया की नगरियाँ,

देखूँ सारा सँसार, चले पर्वत के उस पार,

दुनिया देखन दे देखन दे,

नन्दी पे बिठा के तू, घूमा दे भोले जोगिया.....

मैने सुना पिया पृथ्वी लोक में, पावन है हरिद्वार हो,

हरिद्वार ही गंगा धाम है, कहते है हरी का द्वार हो,

ले चल भोले गंगा किनारें, ले चल भोले गंगा किनारे,

देखूंगी चमत्कार हो,

होती है क्यो व्याकुल, इतनी गणपति की ओ मैया,

बड़ा स्वार्थी संसार, वहां जाना है बेकार,

तप कर लेन दे कर लेन दे,

नन्दी पे बिठा के तू, घूमा दे भोले जोगिया,

गौरा रानी ये गंगा धाम तो, लाखोँ योजन दूर हो,

तुम तो अंतर्यामी हो भोले, फिर काहे मजबूर हो,

अच्छा गौरा गंगा धाम अब, अच्छा गौरा गंगा धाम अब,

हम जाएँगे जरुर हो,

देर नही करो चलो, ओ भोले सांवरिया,

देखूं सारा संसार, चले पर्वत के उस पार,

दुनिया देखन दे देखन दे,

नन्दी पे बिठा के तू, घूमा दे भोले जोगिया,

नंदी पे बिठा के तू, घूमा दे भोले जोगिया.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।