जल भरन जानकी आई

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

जल भरन जानकी आई हो,

मोरी केवल माँ।।

काहे की गगरी काहे की कुंजरी,

काहे की लेर लगाई हो,

मोरी केवल माँ,

जल भरन जानकी आई हो,

मोरी केवल माँ।।

सोने की गगरी रूपा की कुंजरी,

रेशम की लेर लगाई हो,

मोरी केवल माँ,

जल भरन जानकी आई हों,

मोरी केवल माँ।।

कौना की बहुआ कौना की बेटी,

कौना की नार कहाई हो,

मोरी केवल माँ,

जल भरन जानकी आई हों,

मोरी केवल माँ।।

दशरथ बहुआ जनक की बेटी,

राम की नार कहाई हो,

मोरी केवल माँ,

जल भरन जानकी आई हों,

मोरी केवल माँ।।

पांच भगत माई तोरे जस गावे,

रहे चरण चित लाई हो,

मोरी केवल माँ,

जल भरन जानकी आई हों,

मोरी केवल माँ।।

जल भरन जानकी आई हो,

मोरी केवल माँ।।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।