तेरे दरबार जगदम्बे मै आशा लेकर आया हूँ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

तेरे दरबार जगदम्बे मै आशा लेकर आया हूँ,

नही सुनता जिसे कोई सुनाने तुझको आया हुँ,

तेरे दरबार जगदम्बे मैं......

नही है पास कुछ मेरे जो मै तेरी नजर कर दूँ,

मगर इक आंसूओ का मैं पिरोकर हार लाया हूँ,

तेरे दरबार जगदम्बे मैं......

मेरी आशा की दुनिया मे अन्धेरा ही अन्धेरा है,

जगा दो आशा का दीपक तम्मना ले कर आया हूँ,

तेरे दरबार जगदम्बे मैं.....

मै खाकर ठोकरे जग की हुँ आया दर तेरे मैया,

बचा लो मुझको दुनिया से बहुत ही मै सताया हूँ,

तेरे दरबार जगदम्बे मै आशा लेकर आया हूँ,

नही सुनता जिसे कोई सुनाने तुझको आया हुँ,

तेरे दरबार जगदम्बे मैं.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।