मेरी अंखिया च शेरावाली माँ वस गई

नरेन्द्र चंचल
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मेरी अंखिया च शेरावाली माँ वस गई,

नैन खोला किंवे, नैन खोला किंवे

मेरे दिल विच माँ दी तस्वीर वस गई,

भेद खोला किंवे, भेद खोला किंवे

मेरी अंखिया च शेरावाली......

लोकी पुछदे तू मुंहो क्यों नहीं बोलदी,

तक्क दुनिया नु अक्खां क्यों नहीं खोलदी....-2

ए सुन के मै अख जरा होर कस लई।

नैन खोला किंवे, नैन खोला किंवे

मेरी अंखिया च शेरावाली......

मै ता डरदी सुरमा हां वी ना पांदी,

एहो गल मैंनु दिन रात मैनु खांदी.....-2

किते मैया नु सुरमे दी सलाई लग गई।

नैन खोला किंवे, नैन खोला किंवे

मेरी अंखिया च शेरावाली......

मेरे अपने बेगाने ताने मारदे,

ताने मार लैन मेरा की बिगाड़दे....-2

जान मेरी ता जा नी माँ दे नाल लग गई।

नैन खोला किंवे, नैन खोला किंवे

मेरी अंखिया च शेरावाली.......

मैं हां चंचल गुलाम उदे दर दी,

मैं हां नौकरानी मैया जी दे दर दी....-2

मेरे नैना विच मैया जी दी ज्योत जग गई।

नैन खोला किंवे, नैन खोला किंवे

मेरी अंखिया च शेरावाली माँ वस गई,

नैन खोला किंवे, नैन खोला किंवे

मेरे दिल विच ओदी तस्वीर वस गई,

भेद खोला किंवे, भेद खोला किंवे.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।