सोने के रथ पे सवार

नरेन्द्र चंचल
हनुमान जी भजन दुर्गा भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

सोने के रथ पे सवार, भवानी आई है ll

भक्तो करो दीदार, भवानी आई है l

सिर पे मईया के, मुकट विराजे ll

गले में रत्नों के हार, भवानी आई है,

सोने के रथ पे सवार.......

आगे आगे बजरंगी, पीछे भैरों बाला ll

हो रही जय जयकार, भवानी आई है,

सोने के रथ पे सवार.......

पर्दे की झोली, मुरादों से भोली ll

खुशियाँ वोह देगी अपार, भवानी आई है,

सोने के रथ पे सवार......

चंचल ने चरणों में, सीस झुकाया ll

बिनती करो स्वीकार, भवानी आई है,

सोने के रथ पे सवार.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।