नन्द बाबाजी को छैया

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

नन्द बाबाजी को छैया,

वाको नाम है कन्हैया,

वाको नाम है कन्हैया, श्याम,

नन्द बाबाजी को छैया,

वाको नाम है कन्हैया.

कन्हैया कन्हैया रे ..

बड़ो गेंद को खिलैया,

आयो आयो रे कन्हैया .

कन्हैया कन्हैया रे ..

काहे की गेंद है, काहे का बल्ला,

गेंद में काहे का लागा है छल्ला,

कौन ग्वाल ये खेलन आये,

खेलें ता ता थैया,

ओ भैया, कन्हैया,

कन्हैया कन्हैया रे ..

नन्द बाबाजी को छैया,

वाको नाम है कन्हैया.

कन्हैया कन्हैया रे ..

बड़ो गेंद को खिलैया,

आयो आयो रे कन्हैया .

कन्हैया कन्हैया रे ..

रेशम की गेंद है, चंदन का बल्ला,

चंदन का बल्ला,

गेंद में मोतियां लागे हैं छल्ला

लागे हैं छल्ला

सुघड़ मनसुखा खेलन आये

बृज बालन के भैया,

ओ भैया, कन्हैया,

कन्हैया कन्हैया रे ..

नन्द बाबाजी को छैया,

वाको नाम है कन्हैया.

कन्हैया कन्हैया रे ..

बड़ो गेंद को खिलैया,

आयो आयो रे कन्हैया .

कन्हैया कन्हैया रे ..

नीली यमुना है, नीला गगन है,

नीले कन्हैया, नीला कदम्ब है,

सुघड़ श्याम के सुघड़ खेल में,

नीले खेल खिलैया,

ओ भैया, कन्हैया,

कन्हैया कन्हैया रे ..

नन्द बाबाजी को छैया,

वाको नाम है कन्हैया.

कन्हैया कन्हैया रे ..

बड़ो गेंद को खिलैया,

आयो आयो रे कन्हैया .

कन्हैया कन्हैया रे ..

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।