तेरा सब नालों रिश्ता मुकणा

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॥ पावन पाठ ॥

तेरा सब नालों रिश्ता मुकणा,

जदों चार बंदेया ने तेनूं चुकणा......-2

जग विच आदे ही तूं रिश्ते बनाए सी,

ममता दुलारां वाले फंदे गल पाए सी,

तेरे अपने बेगाने कुझ काम नईयों आने,

ए राज़ नहीं कदे लुकणा।

जदों चार बंदेया...

बचपन भोला ते जवानी मस्तानी ए,

ढूकदे बुड़ापे लई दुनियां बेगानी ए,

तेरा सारा परिवार हैगा मतलबी यार,

ए राज़ नहीं कदे लुकणा।

जदों चार बंदेया....

आया कोई नाल नई, जाना किसे नाल नई,

मरने तो बाद वी साथ निभाना नई,

राज कुज ते विचार हैंगा झूठा संसार,

ए राज़ नहीं कदे लुकणा।

जदों चार बंदेया ने तेनूं चुकणा,

तेरा सब नालों रिश्ता मुकणा,

जदों चार बंदेया ने तेनूं चुकणा........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।