मिट्टी दा खिडोना करे

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॥ पावन पाठ ॥

मिट्टी दा खिडोना करे, मिट्टी दा गुमान,

पानी दे बबुले दी, वेखो किन्नी शान,

मिट्टी दा खिडोना करे.....

धरती दे सीने उत्ते, किवें पेया डोलदा,

छोटे जये मुंह नाल, वडडे बोल बोलदा,

एनू वेख हसदा ए, मौत दा तूफ़ान।

पानी दे बबुले दी......

उच्चा उच्चा वेखदा ए, थले दा ख्याल नई,

पैरा हेठ कोई आवे, इसनूं मलाल नई,

वक्त दिया ठोकरां तो, हैगा अनजान।

पानी दे बबुले दी......

धन माल जोड़ जोड़, भरदा ख़ज़ाना ए,

रब्ब जानें एने की, नाल ले जाना ए,

राज इनू पता कीए, ए हैै मेहमान।

पानी दे बबुले दी, वेखो किन्नी शान,

मिट्टी दा खिडोना करे, मिट्टी दा गुमान.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।