पकड़लो हाथ जगदम्बे नहीं तो डूब जाउंगी

पारंपरिक
माता दुर्गा आरती दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

पकड़लो हाथ जगदम्बे नहीं तो डूब जाउंगी

तुम्हारा कुछ न बिगड़ेगा, मैं अपनी जान दे दूंगी

तो बैठी शेर पे मैया, मैं नीचे इस तरह से हु

उत्तर आ शेर से मैया, मैं दर्शन कर के जाउंगी

पकड़लो हाथ जगदम्बे नहीं तो डूब जाउंगी

कि दीपक तुम बनो मैया,कि बाती मैं बनु मैया

जला दो जोत हिर्दय मैं , मैं आरती कर के जाउंगी

पकड़लो हाथ जगदम्बे नहीं तो डूब जाउंगी

खड़ी है बीच भवर नैया, लगा दो पार इसे मैया

खिवैया बन के आ जाओ, नहीं तो डूब जाउंगी

तुम्हारा कुछ न बिगड़ेगा, मैं अपनी जान दे दूंगी

पकड़लो हाथ जगदम्बे नहीं तो डूब जाउंगी..

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।