तेरी जय जय शेराँ वालिए

नरेन्द्र चंचल
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

तेरी जय जय, शेराँ वालिए xll-ll

"कर किरपा, मेहरां वालिए" l

तेरी जय जय, शेराँ वालिए xll-ll

तूँ ही दुर्गा, तूँ ही काली l

सबके काज, सवांरने वाली l

सबकी पार, लगाए नैया l

बन जाती माँ, आप खवईया l

सबकी बिपता, टाली ए...

तेरी जय जय, शेराँ वालिए......

तेरा दर, मुक्ति का द्वारा l

सबसे सुँदर, सबसे न्यारा l

जगदम्बे, तेरी शान निराली l

बाँट रही, सबको खुशहाली l

भक्तों की, रखवाली ए.....

तेरी जय जय, शेराँ वालिए.....

बच्चड़े तेरे, दर पे आए l

बैठे हैं, झोली फैलाए l

सबकी आशा, पूरी करदे l

सबके माँ, भण्डारे भरदे l

चंचल झंडे, वालीए...

तेरी जय जय, शेराँ वालिए......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।