कन्हैया मेरे भईया

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

कन्हैया ओ कन्हैया कन्हैया,

नहीं मेरा कोई भाई,

तू ही बन जा मेरा भैया,

कन्हैया, कन्हैया ओ कन्हैयां कन्हैया.......

बचपन से ही तुझे मानती आई अपना भैया,

जबसे माँ ने मुझे कहा तेरा भाई कृष्ण कन्हैया....-2

गाय चरैया बंसी बजैया जो है रास रचैया,

कन्हैया, कन्हैया ओ कन्हैयां........

बात जोहती रही है तेरी जाने कितनी रातों,

आ राखी बंधवाने भैया इस बहना के हाथों....-2

भूखी प्यासी बैठी भैया लेने तेरी बलइयां,

कन्हैया, कन्हैया ओ कन्हैयां.......

कब से स्वप्न संजोया भैया इक दिन तू आएगा,

बंधवाकर मुझसे राखी माखन मिश्री खायेगा....-2

मैं भी अपनी राखी देखूं भैया की कलैयां,

कन्हैया, कन्हैया ओ कन्हैयां......

कलयुग में ना भाई कोई कान्हा तेरे जैसा,

लाज निभा सकता राखी की तू ही है एक ऐसा....-2

तू ही पार लगाने वाला मेरी जीवन नैया,

कन्हैया, कन्हैया ओ कन्हैयां.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।