हाथ कस के पकड़ ले

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

( तेरी करुणा की घनी छाँव में,

जी लगता है,

सांवरे अब तो तेरे,

गाँव में जी लगता है,

अश्क रुकते नहीं,

आँखों में मेरी रोके से,

इनका तो बस,

तेरे पांवों में जी लगता है। )

हाथ कस के पकड़ ले,

मेरा सांवरे,

मैं छुड़ाना भी चाहूँ,

छुड़ा ना सकूँ,

मेरी हार साँस पे,

श्याम लिख इस तरह,

मैं मिटाना भी चाहूँ,

मिटाना ना सकूँ,

हाथ कस के पकड़ ले,

मेरा सांवरे,

मैं छुड़ाना भी चाहूँ,

छुड़ा ना सकूँ।।

मुझको लूटने का डर,

जग के मेले में है,

पाँच डाकू भी संतो के,

रेले में है,

ठगनी माया की,

मीठी सी बातो में मैं,

कभी आना भी चाहूँ तो,

आ ना सकूँ,

हाथ कस के पकड़ ले,

मेरा सांवरे,

मैं छुड़ाना भी चाहूँ,

छुड़ा ना सकूँ।।

हाथ में तेरे जब तक,

मेरा हाथ है,

मुझको छु ले कोई,

किसकी औकात है,

श्याम प्यारे तू,

सदा मेरे साथ है,

मैं भूलाना भी चाहूँ,

भुला ना सकूँ,

हाथ कस के पकड़ ले,

मेरा सांवरे,

मैं छुड़ाना भी चाहूँ,

छुड़ा ना सकूँ।।

श्याम संदीप को तू,

बना बांसुरी,

तेरे हाथो में बन के रहूं बांसुरी,

नाचू छम छम छमाछम,

सर किसी और दर पे,

कभी सांवरे,

मैं झुकना भी चाहूँ,

झुका ना सकूँ,

हाथ कस के पकड़ ले,

मेरा सांवरे,

मैं छुड़ाना भी चाहूँ,

छुड़ा ना सकूँ।।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।