लोहे का त्रिशूल कमन्डल पीतल का

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

लोहे का त्रिशूल कमण्डल पीतल का,

रूप सुहाना लागे भोले बाबा का॥

मैं जब जब तुमको देखु, तेरी जटा में गंगा विराजे,

मैं मस्त मगन हो जाऊँ, और करू मैं तेरी पूजा,

ओम नमः शिवायः, ओम नमः शिवायः

लोहे का त्रिशूल कमण्डल पीतल का........

मैं जब जब तुमको देखु, तेरे माथे पे चन्दा सोहे,

मैं मस्त मगन हो जाऊँ, और करू मैं तेरी पूजा,

ओम नमः शिवायः, ओम नमः शिवायः

लोहे का त्रिशूल कमण्डल पीतल का........

मैं जब जब तुमको देखु, तेरे गले में नागो की माला,

मैं मस्त मगन हो जाऊँ, और करू मैं तेरी पूजा,

ओम नमः शिवायः, ओम नमः शिवायः

लोहे का त्रिशूल कमण्डल पीतल का........

मैं जब जब तुमको देखु, तेरे हाथ में डमरू साजे,

मैं मस्त मगन हो जाऊँ, और करू मैं तेरी पूजा,

ओम नमः शिवायः, ओम नमः शिवायः

लोहे का त्रिशूल कमण्डल पीतल का........

मैं जब जब तुमको देखु, तेरे अंग में बाघम छाला,

मैं मस्त मगन हो जाऊँ, और करू मैं तेरी पूजा,

ओम नमः शिवायः, ओम नमः शिवायः

लोहे का त्रिशूल कमण्डल पीतल का........

मैं जब जब तुमको देखु, तेरी गोद में गणपति लाला,

मैं मस्त मगन हो जाऊँ, और करू मैं तेरी पूजा,

ओम नमः शिवायः, ओम नमः शिवायः

लोहे का त्रिशूल कमण्डल पीतल का........

मैं जब जब तुमको देखु, तेरे बगल में गोरा माता,

मैं मस्त मगन हो जाऊँ, और करू मैं तेरी पूजा,

ओम नमः शिवायः, ओम नमः शिवायः

लोहे का त्रिशूल कमण्डल पीतल का........

मैं जब जब तुमको देखु, तेरे चरणों में नन्दी राजा,

मैं मस्त मगन हो जाऊँ, और करू मैं तेरी पूजा,

ओम नमः शिवायः, ओम नमः शिवायः

लोहे का त्रिशूल कमण्डल पीतल का........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।